नईदिल्ली। केंद्र सरकार वक्फ संशोधन विधेयक को संसद के इसी सत्र में पारित कराने की तैयारी कर रही है। विधेयक को 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जाएगा। सरकार ने विधेयक पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किया है।
बता दें कि संसद का वर्तमान सत्र 4 अप्रैल तक चलना है। ऐसे में सरकार 2 दिनों के भीतर ही विधेयक को दोनों सदनों से पारित कराना चाहोगी।
आइए जानते हैं संख्याबल क्या सरकार के पक्ष में है।
वर्तमान में लोकसभा में 542 सदस्य हैं। विधेयक पारित कराने के लिए 272 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
फिलहाल भाजपा के पास 240 सांसद हैं। वहीं, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में जनता दल यूनाइटेड के 12, तेलुगु देशम पार्टी के 16, लोक जनशक्ति पार्टी के 5, राष्ट्रीय लोकदल के 2 और शिवसेना के 7 सांसद हैं।
इस तरह एनडीए के पास कुल सदस्यों की संख्या 293 पहुंच जाती है, जो बहुमत के जरूरी आंकड़े से ज्यादा है।
राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 236 और बहुमत का आंकड़ा 119 है।
फिलहाल भाजपा के 98 सदस्य हैं। वहीं, एनडीए में भाजपा के अलावा जेडीयू के 4, टीडीपी के 2, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 3 और रालोद का एक सांसद शामिल है। अगर 6 मनोनीत सदस्यों को जोड़ दिया जाए तो ये संख्या बहुमत से ज्यादा हो जाएगी।
इस लिहाज से सरकार को राज्यसभा में भी ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
लोकसभा में कांग्रेस के 99 सदस्य हैं और विपक्षी गठबंधन इंडिया के 233 सदस्य हैं।
इसके अलावा आजाद समाज पार्टी और शिरोमणि अकाली दल किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। कुछ निर्दलीय सांसद भी किसी के साथ नहीं हैं।
वहीं, राज्यसभा में कांग्रेस के 27 और इंडिया गठबंधन के कुल 85 सदस्य हैं। इसके अलावा 9 सदस्य वाईएसआर कांग्रेस, 7 बीजू जनता दल, 4 ऑल इंडिया द्रविड़ मुन्नेत्र कडग़म (एआईडीएमके) और 3 निर्दलीय और छोटी पार्टियों के हैं।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, भोले-भाले मुसलमानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि सरकार मुसलमानों की संपत्ति और अधिकार छीनने जा रही है। कुछ लोगों द्वारा फैलाई जा रही झूठी बातें हमारे समाज और राष्ट्र के लिए बहुत हानिकारक हैं। मैं सभी से अनुरोध करना चाहूंगा कि कृपया उन नेताओं की पहचान करें जो झूठ बोल रहे हैं। मुझे यह कहते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि भारत में अल्पसंख्यक सबसे सुरक्षित हैं।
केंद्र सरकार ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को बीते साल 28 जुलाई को संसद में पेश किया था। विपक्षी पार्टियों की कड़ी आपत्ति के बाद इसे 8 अगस्त को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया।
समिति ने इस साल 30 जनवरी को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को रिपोर्ट सौंपी थी।
इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जेपीसी की रिपोर्ट के आधार पर विधेयक में प्रस्तावित 23 में से 14 बदलावों को मंजूरी दी थी।
००