नई दिल्ली। फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों को संशोधित स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) नियमों से लाभ होगा, जो आज से लागू हो गई हैं. आज से निवेशकों के लिए एफडी ब्याज दरों पर टीडीएस छूट की सीमा अधिक होगी. अब तक फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं से मिले ब्याज पर टीडीएस में कटौती की जाती थी, अगर यह 40,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये) से अधिक था. लेकिन केंद्रीय बजट 2025 में एफडी योजनाओं पर टीडीएस छूट की सीमा बढ़ा दी गई.
एफडी योजनाओं पर टीडीएस छूट की सीमा व्यक्तियों के लिए 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है. वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर कटौती की सीमा 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये कर दी गई है. एफडी की मूल राशि से कोई टीडीएस नहीं काटा जाता, चाहे उसकी राशि कितनी भी हो. हालांकि, अगर कोई व्यक्ति अपनी एफडी की मूल राशि पर 50,000 रुपये से अधिक ब्याज कमाता है, तो ब्याज टैक्स कटौती के अधीन होगा.
बैंक 50,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 लाख रुपये) से अधिक की एफडी ब्याज पर 10 फीसदी की फ्लैट दर से टीडीएस काटते हैं. अगर निवेशक ने पैन कार्ड डिटेल्स देता है. अगर व्यक्ति ने कोई पैन कार्ड डिटेल्स नहीं दिया है, तो एफडी ब्याज आय पर टीडीएस बढ़कर 20 फीसदी हो जाता है. ज्वाइंट एफडी के लिए प्राथमिक निवेशक के नाम पर टीडीएस काटा जाता है. टैक्स बचत एफडी निवेश, जो आम तौर पर 5 5 साल की अवधि के लिए किया जाता है. नियमों के आधार पर कर कटौती को भी आकर्षित करता है.
टीडीएस राशि व्यक्ति की कुल आय में जोड़ी जाएगी, और यदि यह अभी भी कर योग्य सीमा से कम है, तो काटे गए टीडीएस का दावा किया जा सकता है और इसकी रीइंबर्समेंट की जाएगी. एफडी योजनाओं के अलावा, बढ़ी हुई टीडीएस सीमा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजनाओं में निवेश से होने वाली आय पर भी लागू होती है.
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